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Surya

खुद को इतना भी मत बचाया कर




खुद को इतना भी मत बचाया कर
बारिशें हों तो भीग जाया कर

चाँद लाकर कोई नहीं देगा
अपने चेहरे से जगमगाया कर

दर्द हीरा है, दर्द मोती है
दर्द आँखों से मत बहाया कर

काम ले कुछ हसीन होंठो से
बातों-बातों मे मुस्कुराया कर

धूप मायूस लौट जाती है
छत पे कपड़े सुखाने आया कर

कौन कहता है दिल मिलाने को
कम से कम हाथ तो मिलाया कर

- शक़ील आज़मी

Khud ko Itna bhi mat bachaya kar
barishein Ho to bhig jaya kar

Chand lakar koi nnahi dega,
apane chehre se jagamagaya kar

Dard hira hai, dard moti hai
dard aakhon se mat bahaya kar

kaam le kuch haseen hothon se
bataon baton me mushkaraya kar

dhoop mayoos laut jaati hai
chat pe kapde sukhane aaya kar

kaun kahata hai dil milane ko
kam se kam haat to milaya kar

--
Shaqeel Aazmi
Surya



जहाँ फूलों को खिलना था,वहीँ  खिलते
तो अच्छा था....
तुम्हीं को हमने चाहा था, तुम्हीं मिलते
तो अच्छा था....

कोई आकर हमें पूछे तुम्हें कैसे भुलाया है....
तुम्हारे ख़त को अश्क से शबे गम ने
जलाया है...

हजारों ज़ख्म ऐसे हैं जो सिलते तो अच्छा था....
तुम्हीं को हमने चाहा था, तुम्हीं मिलते
तो अच्छा था....

तुम्हे जितना भुलाया है, तुम्हारी याद आई है....
बहारें जब भी आई हैं, तेरी खुशबू ही लायी हैं.....
तुम्हारे लब मेरी खातिर अगर हिलते
तो अच्छा था...

तुम्हीं को हमने चाहा था, तुम्हीं मिलते
तो अच्छा था....

मिला है लुत्फ़ भी हमको, हंसी यादों के चिलमन
में....
कटी है ज़िन्दगी तुम बिन, मगर इतनी सी है दिल
में...

अगर आते तो अच्छा था, अगर मिलते
तो अच्छा था....
तुम्हीं को हमने चाहा था, तुम्हीं मिलते
तो अच्छा था....

Surya


देखी जो मेरी नब्ज़ तो इक लम्हा सोच कर,
कागज़ लिया और इश्क़ का बीमार लिख दिया॥

मत पूछो की किस तरह चल रही है ज़िन्दगी,
उस दौर से गुज़र रहे हैं जो गुज़रता ही नहीं॥

इतना न याद आया करो कि रात भर सो न सकें,
सुबह को सुर्ख आँखों का सबब पूंछते हैं लोग ॥

मोहब्बत की आँधियों से टकराने में ही तो मज़ा है ग़ालिब,
अगर मरना  ही है तो मोहब्बत में क्यूँ  नहीं ॥

हमारे बाद नहीं आएगा उन्हें चाहत का मज़ा,
वो लोगों से कहते फ़िरेंगे मुझे चाहो उसकी तरह ॥

वो कौन हैं जिन्हें तौबा कि मिल गयी फ़ुर्शत,
हमें गुनाह भी करने को ज़िन्दगी कम है ॥

एक महफ़िल में कई महफिलें होती हैं शरीक,
जिस को भी पास से देखोगे वो तनहा होगा ॥

रोज़ रोते हुए कहती है ज़िन्दगी मुझसे,
सिर्फ़ एक शख़्स के ख़ातिर मुझे बर्बाद न कर ॥

दिल धड़कने का तसव्वुर भी ख़याली हो गया,
एक तेरे जाने से सारा शहर खाली हो गया ॥
Surya


आगे सफर था और पीछे हमसफर था..
रूकते तो सफर छूट जाता और चलते तो हमसफर छूट जाता..
मंजिल की भी हसरत थी और उनसे भी मोहब्बत थी..

ए दिल तू ही बता,उस वक्त मैं कहाँ जाता...
मुद्दत का सफर भी था और बरसो का हमसफर भी था
रूकते तो बिछड जाते और चलते तो बिखर जाते....

यूँ समँझ लो,
प्यास लगी थी गजब की...
मगर पानी मे जहर था...
पीते तो मर जाते और ना पीते तो भी मर जाते.

बस यही दो मसले, जिंदगीभर ना हल हुए!!!
ना नींद पूरी हुई, ना ख्वाब मुकम्मल हुए!!!
वक़्त ने कहा.....काश थोड़ा और सब्र होता!!!
सब्र ने कहा....काश थोड़ा और वक़्त होता!!!
सुबह सुबह उठना पड़ता है कमाने के लिए साहेब...।।
आराम कमाने निकलता हूँ आराम छोड़कर।।

"हुनर" सड़कों पर तमाशा करता है और "किस्मत" महलों में राज करती है!!
"शिकायते तो बहुत है तुझसे ऐ जिन्दगी,
पर चुप इसलिये हु कि, जो दिया तूने,
वो भी बहुतो को नसीब नहीं होता"..

अजीब सौदागर है ये वक़्त भी!!!!
जवानी का लालच दे के बचपन ले गया....
अब अमीरी का लालच दे के जवानी ले जाएगा. .......
Surya
हस्ती-इ-गुलिस्ताएं जहाँ कुछ भी नहीं...
चहकती हैं बुलबुलें जहाँ गुल का निशां कुछ भी नहीं...
कल तक जिनके महलों में हजारों झांड़ और फानूश थे...
पेड़ ही उनकी कब्र पर, बाकी निशा कुछ भी नहीं...

हाथ थे मिले कि ज़ुल्फ़ को सवार दूं...
होंठ थे खुले कि हर बहार को पुकार लूं...
दर्द था दिया गया कि हर दुखी को पुकार लूं
हो सका न कुछ मगर शाम बन गयी सहर..
वह उठी लहर कि बह गए किले बिखर बिखर...
कारवां गुज़र गया...गुबार देखते रहे...

ये जो मेरे शहर में रोशनी लायें होंगे....
इन चिरागों ने ना जाने कितने घर जलाये होंगे...
हाथ उनके भी यकीनन हुए होंगे जख्मी...
जिसने मेरी राह में कांटें बिछाये होंगे..

बरस ए अब्र जितना चाहे तू..
कि अब तेरी बारी है....
कभी दिल था तो हम भी...
रो रो के दरिया बहाया करते थे...

ये शेर हमारे मित्र रणधीर सिंह ने दी हैं...आशा है आप लोगों को पसंद आएँगी...
Surya




जनाजा रोककर वो मेरे से इस अन्दाज़ मे बोले,
गली छोड्ने को कही थी हमने तुमने दुनियां छोड दी।

जो गिर गया उसे और क्यों गिराते हो,
जलाकर आशियाना उसी की राख उड़ाते हो ।

गुज़रे है आज इश्‍क के उस मुकाम से,
नफरत सी हो गयी है मोहब्बत के नाम से ।

जब जुबां खामोशी होती है नज़र से काम होता है,
ऐसे माहौल का ही शायद मोहब्बत नाम होता है।

वो फूल जिस पर ज्यादा निखार होते हैं,
किसी के दस्त हवस का शिकार होते हैं ।

पी लिया करते हैं जीने की तमन्ना में कभी,
डगमगाना भी जरुरी है सम्भलने के लिये ।


मै जिसके हाथ मे एक फूल दे कर आया था,
उसी के हाथ का पत्थर मेरी तलाश मे है ।

यूं तो मंसूर बने फिरते हैं कुछ लोग,
होश उड जाते हैं जब सिर का सवाल आता है ।


मुझे तो होश नही, तुमको खबर हो शायद ,
लोग कहते है कि तुम ने मुझ को बर्बाद कर दिया ।


देखिए गौर से रुक कर किसी चौराहे पर,
जिंदगी लोग लिए फिरते हैं लाशों के तरह ।

इस नगर मे लोग फिरते है मुखौटे पहन कर,
असल चेहरों को यहां पह्चानना मुमकिन नही ।
Surya


किस-दर्ज़ा दिशिकां थे मुहब्बत के हादसे,
हम ज़िन्दगी में फ़िर कोई अरमां न कर सके...
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जाने किस चमन की शाख़ सूनी हो गई होगी,
फ़कत ये सोच कर हम फूल तोहफ़े में नही लेते...
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उम्र भर यही गलती करते रहे...
धूल थी चेहरे पे,
और हम आइना साफ करते रहे...
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महफ़िल का ये सन्नाटा तो तोड़े तो कोई नाज़िस,
सागर ही छलक जाए...
आंशु ही टपक जाए...
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आख़िर जाम में क्या बात थी ऐसी साकी,
हो गया पी के जो ख़ामोश वो ख़ामोश रहा....
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ना छेड़ ऐ हमनशीं कैफियते सहबा के अफसाने
मुझे वो दश्ते खुदफरामोशी के चक्कर याद आते हैं

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Submitted By: देवेश चौरसिया