अज्ञात लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
अज्ञात लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
Surya


बेटे भी घर छोड़ जाते हैं। 

जो तकिये के बिना कहीं…भी सोने से कतराते थे…
आकर कोई देखे तो वो…कहीं भी अब सो जाते हैं …

खाने में सो नखरे वाले…अब कुछ भी खा लेते हैं…

अपने रूम में किसी को…भी नहीं आने देने वाले…
अब एक बिस्तर पर सबके…साथ एडजस्ट हो जाते हैं…

बेटे भी घर छोड़ जाते हैं।।।

घर को मिस करते हैं लेकिन…कहते हैं ‘बिल्कुल ठीक हूँ’…
सौ-सौ ख्वाहिश रखने वाले…अब कहते हैं ‘कुछ नहीं चाहिए’…
पैसे कमाने की जरूरत में…वो घर से अजनबी बन जाते हैं…

बेटे भी घर छोड़ जाते हैं। 

बना बनाया खाने वाले …अब वो खाना खुद बनाते है …
माँ-बहन-बीवी का बनाया अब वो कहाँ खा पाते है।।
कभी थके-हारे भूखे भी सो जाते हैं।

लड़के भी घर छोड़ जाते है।

मोहल्ले की गलियां… जाने-पहचाने रास्ते…
जहाँ दौड़ा करते थे अपनों के वास्ते…
माँ बाप यार दोस्त सब पीछे छूट जाते हैं…


तन्हाई में करके याद…लड़के भी आँसू बहाते हैं…
लड़के भी घर छोड़ जाते हैं।।


नई नवेली दुल्हन, जान से प्यारे बहिन- भाई,
छोटे-छोटे बच्चे, चाचा-चाची, ताऊ-ताई ,
सब छुड़ा देती है साहब, ये रोटी और कमाई।
मत पूछो इनका दर्द वो कैसे छुपाते हैं,

बेटियाँ ही नही साहब, बेटे घर छोड़ जाते हैं।।।

Surya

नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय भस्माङ्गरागाय महेश्वराय।

नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय तस्मै नकाराय नम: शिवाय।। 

महादेव, जय माँ विन्ध्यवासिनी, ऊँ गणेशायः नमः


ना आदि ना अंत है उसका।
वो सबका, न इनका उनका।
वही शून्य है, वही इकाई।
जिसके भीतर बसा शिवायः।


आँख मूंदकर देख रहा है।
साथ समय के खेल रहा है।
महादेव महाएकाकी।
जिसके लिए जगत है जाकी।


वही शून्य है, वही इकाई।
जिसके भीतर बसा शिवायः।


राम भी उसका, रावण उसका।
जीवन उसका, मरण भी उसका।
तांडव है, और ध्यान भी वो है।

अज्ञानी का ज्ञान भी वो है।

इसको काँटा लगे न कंकर।
रण में रूद्र, घरों में शंकर।

अंत यही सारे विघ्नों का।
इस भोले का वार भयंकर।


वही शून्य है, वही इकाई।
जिसके भीतर बसा शिवायः।





Na aadi na ant hai uska.

Wo sabka na inka unka
wahi soonya hai wahi ikaai
jiske bheetar basa shivay

aankh moondkar dekh raha hai
sath samay ke khel raha hai
mahadev maha ekaki
jiske liye jagat hai saaki


wahi soonya hai wahi ikaai
jiske bheetar basa shivay

raam bhi uska raavan uska
jeevan uska, maran bhi uska
tandav hai, aur dhayan bhi wo hai
agyani ka gyan bhi wo hai


isko kaanta lage na kankar
ran me roodra, gharo me shankar
ant yahi saare vighno ka
is bhole ka waar bhayankar

wahi soonya hai wahi ikaai
jiske bheetar basa shivay.


Surya

नज़र निशाने पे ना हो तो निशाना चूक जाता है, राश्ता भुला तो मज़िल खो जाती है ।
मेरी मंज़िल और मेरा निशाना कुछ और ही है !

Nazar Nishane pe na ho to Nishana chook jaata hai, aur rashta bhula to manzil kho jati hai.
Meri manzil aur mera nishana kuch aur hi hai.

Surya



जहाँ फूलों को खिलना था,वहीँ  खिलते
तो अच्छा था....
तुम्हीं को हमने चाहा था, तुम्हीं मिलते
तो अच्छा था....

कोई आकर हमें पूछे तुम्हें कैसे भुलाया है....
तुम्हारे ख़त को अश्क से शबे गम ने
जलाया है...

हजारों ज़ख्म ऐसे हैं जो सिलते तो अच्छा था....
तुम्हीं को हमने चाहा था, तुम्हीं मिलते
तो अच्छा था....

तुम्हे जितना भुलाया है, तुम्हारी याद आई है....
बहारें जब भी आई हैं, तेरी खुशबू ही लायी हैं.....
तुम्हारे लब मेरी खातिर अगर हिलते
तो अच्छा था...

तुम्हीं को हमने चाहा था, तुम्हीं मिलते
तो अच्छा था....

मिला है लुत्फ़ भी हमको, हंसी यादों के चिलमन
में....
कटी है ज़िन्दगी तुम बिन, मगर इतनी सी है दिल
में...

अगर आते तो अच्छा था, अगर मिलते
तो अच्छा था....
तुम्हीं को हमने चाहा था, तुम्हीं मिलते
तो अच्छा था....

Surya


देखी जो मेरी नब्ज़ तो इक लम्हा सोच कर,
कागज़ लिया और इश्क़ का बीमार लिख दिया॥

मत पूछो की किस तरह चल रही है ज़िन्दगी,
उस दौर से गुज़र रहे हैं जो गुज़रता ही नहीं॥

इतना न याद आया करो कि रात भर सो न सकें,
सुबह को सुर्ख आँखों का सबब पूंछते हैं लोग ॥

मोहब्बत की आँधियों से टकराने में ही तो मज़ा है ग़ालिब,
अगर मरना  ही है तो मोहब्बत में क्यूँ  नहीं ॥

हमारे बाद नहीं आएगा उन्हें चाहत का मज़ा,
वो लोगों से कहते फ़िरेंगे मुझे चाहो उसकी तरह ॥

वो कौन हैं जिन्हें तौबा कि मिल गयी फ़ुर्शत,
हमें गुनाह भी करने को ज़िन्दगी कम है ॥

एक महफ़िल में कई महफिलें होती हैं शरीक,
जिस को भी पास से देखोगे वो तनहा होगा ॥

रोज़ रोते हुए कहती है ज़िन्दगी मुझसे,
सिर्फ़ एक शख़्स के ख़ातिर मुझे बर्बाद न कर ॥

दिल धड़कने का तसव्वुर भी ख़याली हो गया,
एक तेरे जाने से सारा शहर खाली हो गया ॥
Surya




एक मीठा उलाहना
" अजी सुनते हो एक बात कहू आपसे ???"
एक 80 साल की पत्नी ने अपने 84 साल के पति से
कहा .
पति अपनी पत्नी के करीब आया और बोला कहो .
पत्नी भावुक होकर बोली ,
" आपको याद है आपने हमारी शादी से पहले
अपनी माँ को छुपकर एक ख़त लिखा था जिसमे आपने
अपने गुस्से का इजहार करते हुए लिखा था की आप मुझसे
शादी नहीं करना चाहते
क्युकी आपको मेरा चेहरा पसंद नहीं था "
पति ने हैरान होकर पूछा ,
" वो ख़त तुझे कहा मिला वो तो बहुत पुरानी बात हे "
पत्नी आँखों में आंसू भरके बोली ,
" कल आपके बक्से से मुझे ये पुराना ख़त मिला .
मुझे
नहीं पता था की ये शादी आपकी मर्जी के खिलाफ
हुई थी . वरना में खुद ही मना कर देती "
पति ने अपना सर अपनी पत्नी की बांहों में रखा और
बोला ,
अरे पगली उस वक्त मैं सिर्फ 12 साल का था और मुझे
लगा तू मेरे से शादी करके जब आएगी तो मेरे कमरे में मेरे
साथ मेरा बिस्तर और तकिये पे सोएगी .
मेरे सारे
खिलोनो के साथ खेलेगी और मेरी गुल्लक से पैसे
चुरा लेगी .
लेकिन उस वक्त मैं ये कहा जानता था की तू
मेरी जिन्दगी में आकर मेरी जिन्दगी को एक कमरे से
बाहर एक घर तक ले जायेगी.
ये कहा जानता था की मुझे कपड़ो के बने खिलोनो से
कही ज्यादा खुबसूरत और प्यारे खिलोने ( हमारे बच्चे )
तू मुझे देगी .
ये कहा जानता था की मेरी चिल्लर से भरी गुल्लक के
मुकाबले तू मुझे प्यार की बेशकीमती दौलत देगी ,
अब बोल और भी कुछ पूछना बाकी हे ??"
पत्नी ने तसल्ली के साथ कहा .
" भगवान् का शुक्र हे . में तो समझ रही थी तुम्हे उस
पड़ोस वाली से प्रेम था "
पति ने हंसते हुए कहा ,
" अजी रहने दो कहा वो और
कहा मेरी राजकुमारी...... "
पत्नी और पति एक दुसरे से लिपट गए .
प्यार के
आखिरी सफ़र की मंजिल अब कुछ ही दूर बची थी
Surya


आगे सफर था और पीछे हमसफर था..
रूकते तो सफर छूट जाता और चलते तो हमसफर छूट जाता..
मंजिल की भी हसरत थी और उनसे भी मोहब्बत थी..

ए दिल तू ही बता,उस वक्त मैं कहाँ जाता...
मुद्दत का सफर भी था और बरसो का हमसफर भी था
रूकते तो बिछड जाते और चलते तो बिखर जाते....

यूँ समँझ लो,
प्यास लगी थी गजब की...
मगर पानी मे जहर था...
पीते तो मर जाते और ना पीते तो भी मर जाते.

बस यही दो मसले, जिंदगीभर ना हल हुए!!!
ना नींद पूरी हुई, ना ख्वाब मुकम्मल हुए!!!
वक़्त ने कहा.....काश थोड़ा और सब्र होता!!!
सब्र ने कहा....काश थोड़ा और वक़्त होता!!!
सुबह सुबह उठना पड़ता है कमाने के लिए साहेब...।।
आराम कमाने निकलता हूँ आराम छोड़कर।।

"हुनर" सड़कों पर तमाशा करता है और "किस्मत" महलों में राज करती है!!
"शिकायते तो बहुत है तुझसे ऐ जिन्दगी,
पर चुप इसलिये हु कि, जो दिया तूने,
वो भी बहुतो को नसीब नहीं होता"..

अजीब सौदागर है ये वक़्त भी!!!!
जवानी का लालच दे के बचपन ले गया....
अब अमीरी का लालच दे के जवानी ले जाएगा. .......
Surya

सौ बरस के बूढे के रूप में याद किये जाने के विरुद्ध!!


मैं फिर कहता हूँ,

फांसी के तख्ते पर चढाये जाने के पचहत्तर बरस बाद भी,

'क्रांति की तलवार विचारों की सान पर तेज़ होती है',



वह बम,

जो मैंने असेम्बली में फेंका था,

उसका धमाका सुनने वालों में अब शायद ही कोई बचा हो,



लेकिन वह सिर्फ एक बम नहीं, 

एक विचार था,और, विचार सिर्फ सुने जाने के लिए नहीं होते



माना की यह मेरे जनम का सौवां बरस है,

लेकिन मेरे प्यारों,

मुझे सिर्फ सौ बरस के बूढों मे मत ढूंढो



वे तेईस बरस कुछ महीने,

जो मैंने एक विचार बनने की प्रक्रिया मे जिए,

वे इन सौ बरसों मे कहीं खो गए

खोज सको तो खोजो



वे तेईस बरस

आज भी मिल जाएँ कहीं, किसी हालत में ,

किन्हीं नौ जवानों में ,



तो उन्हें मेरा सलाम कहना,

और उनका साथ देना...

और अपनी उम्र पर गर्व करने वाले बूढों से कहना,

अपने बुढापे का "गौरव" उन पर न्योछावर कर दें |



SAU BARASH KE BOODHE KE ROOM PE YAAD KIYA JAANE KE VIRUDDH

Main phir kahata hoon,
fanshi ke takhte par chadhaye jaane ke pachhattar barash ke baad bhi,
kranti kee talwaar vicharon kee saan par tej hoti hai


wah bam
jo maine asembale me phenka tha
uska dhamaaka sunnae walon me ab shayad hi koi bacha ho,

Lekin wah sirf ek bam nahi,
ek vichar tha, aur, vihar sirf sune jaane ke liye nahi hote

maana kee yah mere janam ka sauvan baras hai,
lekin mere pyaron,
mujhe sirf sau barash ke boodhon me mat dhundho


ve teish barash kuch maheene
jo maine ek vichar banane kee prakriya me jiye
ve in sau barsho me kahin kho gaye
khoj sako to khojo..

ve teish baras
aaj bhi mil jaein kahin, kisi haalat mein,
kindhi nau jawano me,


to unhe mera salam kahana,
aur unka saath dena...
aur apni umra par garv karne wale boodhon se kahana,

apne budhape ka gaurav un par nyochavar kar dein...
Surya
बगिया बगिया बालक भागे
तितली फिर भी हाथ ना लागे
इस पगले को कौन बताए
ढूंढ रहा है जो तू जग में
कोइ जो पाए तो मन में ही पाए

सपनों से भरे नैना
तू नींद है न चैना

ऐसी डगर कोई अगर जो अपनाए
हर राह के वो अंत पे रास्ता ही पाए
दूप का रस्ता जो  पैर जलाए
मोड़ तो आए पर चाव न आये
राही जो चलता है चलता ही जाए
कोई नहीं है जो कहीं उसे समझाए

सपनो से भरे नैना
तू नींद है न चैना-२

नैना रे..........................
नैना रे........................

सा ध पा मा गा मा पा ध

दूर ही से सागर जिसे हर कोई माने
पानी है वो या रेत है ये कौन जाने
जैसे के  दिन से रैन अलग है
सुख है अलग और चैन अलग है
पर जो ये देखे वो  नैन अलग है
चैन तो है अपना सुख है पराए

सपनो से भरे नैना
तू नींद है है या चैना
Surya


ज़रूरी काम है लेकिन रोज़ाना भूल जाता हूँ,
मुझे तुम से मोहब्बत है बताना भूल जाता हूँ!!

तेरी गलियो मे फिरना इतना अच्छा लगता है,
मै रास्ता याद रखता हूँ ठिकाना भूल जाता हूँ!!

बस इतनी बात पर मै लोगो को अच्छा नही लगता,
मै नेकी कर तो देता हूँ जताना भूल जाता हूँ!!

शरारत ले के आंखो मे वो तेरा देखना तौबा,
मै तेरी नज़रो पे जमी नज़रे झुकाना भूल जाता हूँ!!

मोहब्बत कब हुई कैसे हुई सब याद है मुझको,
मै कर के मोहब्बत को भुलाना भूल जाता हूँ!!

ज़रूरी काम है लेकिन रोज़ाना भूल जाता हूँ,
मुझे तुम से मोहब्बत है बताना भूल जाता हूँ!!

--अज्ञात
Surya

आज वेलेंटाइन्स डे है. सो, एक ताजा कहानी सुनिए....

एक लड़का है. उसने आई आई टी से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की. फिर एमबीए की डिग्री ली और फिलहाल एक मल्टीनेशनल कंपनी में ऊँचे ओहदे पर है. अरसा पहले उसे एक लड़की से मोहब्बत हो गयी. आज उसके साथ शादी हो रही है. लड़का अपने पैरेंट्स का इकलौता बेटा है. पैरेंट्स ने उसे लेकर कई सपने देखे थे. बेटे ने आइआईटी का इंट्रेंस पास किया था, तो वे बहुत खुश हुए थे. पढ़ाई पूरी करने के बाद मल्टीनेशनल कंपनी ने जब उसे सालाना बीस लाख के पैकेज पर नौकरी दी थी, तो जाहिर तौर पर उनकी खुशियों का ठिकाना न था.

पर दो महीने पहले जब लड़के ने पहली बार पैरेंट्स को अपने लव अफेयर के बारे में बताया और अपनी प्रेमिका से शादी की इच्छा का इजहार किया तो घर में हंगामा खड़ा हो गया.
पैरेंट्स ने कहा - क्या हमने यही दिन देखने के लिए तुम्हारी पढ़ाई पर इतना खर्च किया था?
लड़का भी अड गया. उसने कहा - शादी तो वह इसी लड़की से करेगा.
पैरेंट्स ने हथियार डाल दिए.
कहा - ठीक है, तुम्हारी खुशी के खातिर हम इस रिश्ते को तैयार हैं लेकिन ये तो बताओ कि लड़की के घर वाले दहेज कितना देंगे? 
लड़का बोला - नहीं वो कुछ भी नहीं दी पाएंगे. 
पैरेंट्स को फिर झुकना पड़ा.
पूरी कहानी का लब्बोलुआब यह है कि शिक्षा और तरक्की की कई सीढियां चढ़ने के बाद भी हमारी पीढ़ी दहेज जैसी रूढ़िवादी प्रथा और बीसवीं सदी के इण्डिया की मानसिकता से खुद को आजाद करने को तैयार नहीं, लेकिन दूसरी तरफ उन्ही के घरों में दूसरी पीढ़ी उम्मीद की रोशनी भी जगाती है.

वैलेंटाइन्स डे के कल्चर को हम भले इम्पोर्टेंट न कहें, लेकिन पश्चिम की हवा के इस झोंके से अगर दहेज जैसी रूढियों का अंत होता दिखता हो तो खिड़कियाँ खोलने में भला हर्ज क्यों? खुलेगी खिड़की तो कुछ ताजा हवा ही आएगी और सुखद बदलाव ही होंगे...
Surya
मेरे इर्द -गिर्द घूमता हैं वो एक साया है...
जो हर दम मेरे साथ रहना चाहता है...
जहाँ मैं जाती हूँ...वो पीछे-पीछे आता है...
क्यूंकि वो साया मेरी ही परछाई है...
जो कभी मुझसे जुदा होना नहीं चाहती...
लेकिन हर दम रूप बदलती है जैसे...
सुबहा दुगनी...शाम चौगनी...दोपहर में सिकुड़ी हुयी...
और अंधेरे में गुम होती हुई... मेरे अन्दर सिमट जाती है...
और कहती हैं...बस कुछ देर का अँधेरा हैं...फिर रौशनी होगी...
और हम साथ होंगे...मैं मुस्कुराती हूँ...और कहती है...
ये दिलासा मुझे मत दो...मैं अंधेरों में भी जीना जानती हूँ...
मुझे तुम्हारी ज़रुरत नहीं...तुम्हे मेरी ज़रुरत हैं...तुम कल फिर लौट के आओगे...
क्यूंकि मेरी वहज से तुम्हारा वजूद है...और यही सच है...यही सच है...




यह कविता हमारे मित्र अचिन्त्य चन्द्र मिश्र जी ने दी थी...
धन्यवाद अचिन्त्य...
Surya
सत्य क्या है?

होना या न होना?

या दोनों ही सत्य हैं?

जो है, उसका होना सत्य है,

जो नहीं है, उसका न होना सत्य है।

मुझे लगता है कि

होना-न-होना एक ही सत्य के

दो आयाम हैं,

शेष सब समझ का फेर,

बुद्धि के व्यायाम हैं।

किन्तु न होने के बाद क्या होता है,

यह प्रश्न अनुत्तरित है।



प्रत्येक नया नचिकेता,

इस प्रश्न की खोज में लगा है।

सभी साधकों को इस प्रश्न ने ठगा है।

शायद यह प्रश्न, प्रश्न ही रहेगा।

यदि कुछ प्रश्न अनुत्तरित रहें

तो इसमें बुराई क्या है?

हाँ, खोज का सिलसिला न रुके,

धर्म की अनुभूति,

विज्ञान का अनुसंधान,

एक दिन, अवश्य ही

रुद्ध द्वार खोलेगा।

प्रश्न पूछने के बजाय


यक्ष स्वयं उत्तर बोलेगा।
Surya
ऐ खुदा तूने मोहब्बत ये बनाई क्यूँ है?
गर बनाई तो मोहब्बत में ज़ुदाई क्यूँ है?

क्यूँ दिया प्यार मुझे इसकी ज़रुरत क्या थी..
मेरी बरबादी में शामिल तेरी हिकमत क्या थी..

मेरी राहों में तो खुशबू का सफ़र रहता था...
दिल में आबाद गुलाबों का नगर रहता था...

ज़िन्दगी खार भरी राहों में लायी क्यूँ है?

मैं अगर रोओं तो शेहरा को समंदर कर दूं..
सख्त हो जाऊं तो मोम को पत्थर कर दूं..

राख हो जाए तो जहाँ में मैं अगर आह भरूँ..
आसमाँ टूट पड़े तुझसे जो फ़रियाद करूँ...

इतनी गहराई मेरे इश्क में आयी क्यूँ हैं?

ऐ खुदा तूने ये मोहब्बत बनाई क्यूँ है?
गर बनाई तो मोहब्बत में ज़ुदाई क्यूँ है?
Surya



मुश्किल है अपना मेल प्रिये, ये प्यार नही है खेल प्रिये
मुश्किल है अपना मेल प्रिये, ये प्यार नही है खेल प्रिये

तुम ऍम ऐ फर्स्ट डिविजन हो, मैं हुआ मेट्रिक फेल प्रिये
मुश्किल है अपना मेल प्रिये, ये प्यार नही है खेल प्रिये

तुम फौजी अफसर की बेटी , मैं तो किसान का बेटा हूँ
तुम रबडी खीर मलाई हो, मै तो सत्तू सपरेटा हूँ
तुम ऐ-सी घर में रहती हो, मैं पेड के नीचे लेटा हूँ
तुम नई मारुती लगती हो, मै स्कूटर लम्ब्रेटा हूँ
इस कदर अगर हम छुप छुप कर, आपस में प्यार बढ़ाएँगे
तो एक रोज तेरे डेडी, अमरीश पुरी बन जाएँगे

सब हड्डी पसली तोड़ मुझे वो भिजव देंगे जेल प्रिये
मुश्किल है अपना मेल प्रिये, ये प्यार नही है खेल प्रिये

तुम अरब देश की घोड़ी हो, मैं हूँ गदहे की नाल प्रिये
तुम दीवाली का बोनस हो, मै भूखों की हड़ताल प्रिये
तुम हीरे जडी तश्तरी हो, मैं एल्युमिनिअम का थाल प्रिये
तुम चिकन सूप बिरयानी हो, मैं कंकड वाली दाल प्रिये
तुम हिरन चौकड़ी भरती हो, मै हू कछुए की चाल प्रिये
तुम चंदन वन की लकड़ी हो, मैं हू बबूल की छाल प्रिये

मै पके आम सा लटका हूँ मत मारो मुझे गुलेल प्रिये
मुश्किल है अपना मेल प्रिये, ये प्यार नही है खेल प्रिये

मै शनी देव जैसा कुरूप, तुम कोमल कन्चन काया हो
मै तन से मन से कांशी राम, तुम महा चंचला माया हो
तुम निर्मल पावन गंगा हो, मैं जलता हुआ पतंगा हूँ
तुम राज घाट का शांति मार्च, मै हिन्दू मुस्लिम दंगा हूँ
तुम हो पूनम का ताजमहल, मै काली गुफा अजन्ता की
तुम हो वरदान विधाता का, मैं गलती हूँ भगवंता की

तुम जेट विमान की शोभा हो, मैं बस की ठेलमठेल प्रिये
मुश्किल है अपना मेल प्रिये, ये प्यार नही है खेल प्रिये

तुम नई विदेशी मिक्सी हो, मै पत्थर का सिलबट्टा हूँ
तुम ए. के. सैतालिस जैसी, मैं तो एक देसी कट्टा हूँ
तुम चतुर राबडी देवी सी, मै भोला भाला लालू हूँ
तुम मुक्त शेरनी जंगल की, मै चिड़िया घर का भालू हूँ
तुम व्यस्त सोनिया गाँधी सी, मैं वीपी सिंह सा खाली हूँ
तुम हँसी माधुरी दीक्षित की, मैं हवलदार की गाली हूँ

कल जेल अगर हो जाये तो, दिलवा देना तुम ‘बेल’ प्रिये
मुश्किल है अपना मेल प्रिये, ये प्यार नही है खेल प्रिये

मैं ढाबे के ढाँचे जैसा, तुम पाँच सितार होटल हो
मैं महुए का देसी ठर्रा, तुम ‘रेड लेबल’ की बोतल हो
तुम चित्रहार का मधुर गीत, मै कृषि दर्शन की झाड़ी हूँ
तुम विश्व सुन्दरी सी कमाल, मैं तेलिया छाप कबाड़ी हूँ
तुम सोनी का मोबाइल हो, मैं टेलीफोन वाला चोगा
तुम मछली मनसरोवर की, मैं हूँ सागर तट का घोंघा

दस मंजिल से गिर जाऊँगा, मत आगे मुझे धकेल प्रिये
मुश्किल है अपना मेल प्रिये, ये प्यार नही है खेल प्रिये

तुम सत्ता की महारानी हो, मैं विपक्ष की लचारी हूँ
तुम हो ममता, जयललिता सी, मैं कुआँरा अटल बिहारी हूँ
तुम तेंदुलकर का शतक प्रिये, मैं फालो-ऑन की पारी हूँ
तुम गेट्ज, मारुती , सैंट्रो हो, मैं लेलैंड की लारी हूँ

मुझको रेफ्री ही रहने दो, मत खेलो मुझसे खेल प्रिये
मुश्किल है अपना मेल प्रिये, ये प्यार नही है खेल प्रिये……

--अज्ञात

Surya

बदनीयतों की चाल, परिन्दे को क्या पता
फैला कहाँ है जाल, परिन्दे को क्या पता

लोगों के, कुछ लज़ीज़, निवालों के वास्ते
उसकी खिंचेगी खाल, परिन्दे को क्या पता

इक रोज़ फिर उड़ेगा कि मर जाएगा घुटकर
इतना कठिन सवाल, परिन्दे को क्या पता

पिंजरा तो तोड़ डाला था, पर था नसीब में
उससे भी बुरा हाल, परिन्दे को क्या पता

देखा है जब से एक कटा पेड़ कहीं पर
है क्यूं उसे मलाल, परिन्दे को क्या पता

उड़ कर हजारों मील इसी झील किनारे
क्यूं आता है हर साल, परिन्दे को क्या पता

एक-एक कर के सूखते ही जा रहे हैं क्यों
सब झील नदी ताल, परिन्दे को क्या पता



Surya
किसी के इतने पास न जा
के दूर जाना खौफ़ बन जाये
एक कदम पीछे देखने पर
सीधा रास्ता भी खाई नज़र आये

किसी को इतना अपना न बना
कि उसे खोने का डर लगा रहे
इसी डर के बीच एक दिन ऐसा न आये
तु पल पल खुद को ही खोने लगे

किसी के इतने सपने न देख
के काली रात भी रंगीली लगे
आंख खुले तो बर्दाश्त न हो
जब सपना टूट टूट कर बिखरने लगे

किसी को इतना प्यार न कर
के बैठे बैठे आंख नम हो जाये
उसे गर मिले एक दर्द
इधर जिन्दगी के दो पल कम हो जाये

किसी के बारे मे इतना न सोच
कि सोच का मतलब ही वो बन जाये
भीड के बीच भी
लगे तन्हाई से जकडे गये

किसी को इतना याद न कर
कि जहा देखो वोही नज़र आये
राह देख देख कर कही ऐसा न हो
जिन्दगी पीछे छूट जाये

ऐसा सोच कर अकेले न रहना,
किसी के पास जाने से न डरना
न सोच अकेलेपन मे कोई गम नही,
खुद की परछाई देख बोलोगे "ये हम नही"

--अज्ञात
Surya
डूब रही हैं साँसे मगर ये गुमान बाक़ी है
आने का किसी शख्स के अभी उम्मीद बाक़ी है

मुद्दत होयी एक शख्स को बिछ्ड़े लेकिन
आज तक मेरे दिल पे एक निशाँ बाक़ी है

वो आशियाँ छिन गया तो कोई गम नही
अभी तो मेरे सिर पे ये आसमान बाक़ी है

कश्ती ज़रा किनारे के करीब ही रखना
बिखरी हुई लहरों में अभी तूफान बाक़ी है

तुम्हारे ही अश्कों ने लब भर दिए वर्ना
अभी तो मेरे दुखों कि दास्ताँ बाक़ी है

गमों से कह दो कि अभी ना अपना सामान बांधें
कि अभी तो मरे जिस्म में कुछ ओर जान बाक़ी है……..

जा चुके हैं सब लोग खामोश पडी है बस्ती
मगर किसी आस पे…अभी कुछ सांस बाक़ी है…

--अज्ञात
Surya
अल्फ़ाज़ों मैं वो दम कहाँ जो बया करे शख़्सियत हमारी,
रूबरू होना है तो आगोश मैं आना होगा ।

यूँ देखने भर से नशा नहीं होता जान लो साकी,
हम इक ज़ाम हैं हमें होंठो से लगाना होगा ......

हमारी आह से पानी मे भी अंगारे दहक जाते हैं ;
हमसे मिलकर मुर्दों के भी दिल धड़क जाते हैं ..

गुस्ताख़ी मत करना हमसे दिल लगाने की साकी ;
हमारी नज़रों से टकराकर मय के प्याले चटक जाते हैं॥

--अज्ञात
Surya
कभी उनकी याद आती है कभी उनके ख्व़ाब आते हैं,
मुझे सताने के सलीके तो उन्हें बेहिसाब आते हैं।

कयामत देखनी हो गर चले जाना उस महफिल में,
सुना है उस महफिल में वो बेनकाब आते हैं।

कई सदियों में आती है कोई सूरत हसीं इतनी,
हुस्न पर हर रोज कहां ऐसे श़बाब आते हैं।

रौशनी के वास्ते तो उनका नूर ही काफी है,
उनके दीदार को आफ़ताब और माहताब आते हैं।

--
अज्ञात